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आतंकी का कोई धर्म नहीं होता...

अब यह समझना और समझाना कुछ आसान हो गया है कि... आतंकीयों का कोई धर्म नहीं होता...!  पर शर्त अभी भी वो ही है कि समझने कि कोशिश की जाये...! (c) ज़फर कि खबर  

बला, बला, बला...

चुनाव करीब हैं - कृप्या वाणी पर संयम रखें... क्योंकि जो होने वाला है वह निश्चित ही सबकी सोंच से परे होगा... इस बार जनता सिर्फ और सिर्फ विकास और कानून व्यस्था को देखते हुए ही मतदान करने वाली है... झूठे वायदे एवं प्रलोभन देने से कुछ नहीं होने वाला... जनता धरातल पैर देखना चाहती है कि क्या कार्य हुआ है... कुछ समझ ना आये तो "नाटो" पर ही सही... वोट ज़रूर दें... (c) ज़फर की खबर

मेरठ में - नमो

अगर मेरठ से चुने गए बीजेपी के जनप्रतिनिधियो को पार्टी द्वारा कुछ पद दे दिए गए होते तो पार्टी के दोनो सर्वोच्च नेताओ को इतनी भागदौड नहीं करनी पडती... (c) ज़फर की खबर

उत्तर प्रदेश - अगला मुख्यमंत्री कौन?

सुगबुगाहट: उत्तर प्रदेश में बीजेपी-बीएसपी की हुकूमत बनने की... मुख्यमंत्री कौन होगा... "................" (सही पकड़े हैं) और कौन होगा, बहन जी के सिवा. (c) ज़फर की खबर

उत्तर प्रदेश चुनाव...

अगर प्रदेश का चुनाव "विकास" के नाम पर लड़ा गया तो फिर से आएगी सपा सरकार... क्योंकि विकास के नाम पर औरों को कुछ नहीं मिलने वाला, इस प्रदेश में...  क्युकि भाजपा खुद ही अब कांग्रेस युक्त हो गई है. सत्ता के खेल में सब "जायज़" होता है, याद रहे कि जनता सब जानती है जी...                            (c) zafar ki khabar

Obey the Master...

It is enough now... everyone putting his / her finger on the supreme body of the country without knowing the fact that why such thing happens in the country, try to understand. I am writing this below to give you all an idea and fully understand that you all are capable to find out the details about it: We are only puppets, our strings are being pulled by a force, which is not even known to, most of us. Obey the Master, at any cost. Who is the Master??? No one, even care to know this. It is Surprising, but Fact. Explore it - if you can... (c) zafar ki khabar

Bla, bla, bla on FB / WhatsApp...

वो बातें जिसका मतलब कुछ नहीं निकलता पर होती और की जाती हैं उन बातों को "औरतों" की बातें कहा जाता है - यह सब को पता है और जग ज़ाहिर भी है, किसी को इस पर शक नहीं होना चाहिए... और आज हमारा FB / WhatsApp पर यही हाल हो गया है - हम सब ना चाह कर भी "अमुक बातों" का हिस्सा हो गए है, जिसकी खिल्ली हमारे पूर्वज उड़ाया करते थे... आज हम FB पर आते हैं bla, bla, करते है और खुश हो जाते हैं - क्योंकि: हम कुछ करने लायक़ बचे / रहे ही नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे पुराने वक़्त में घर की house wife हुआ करती थीं... सब कुछ जानते हुए भी उनका समाज तथा इसके बदलाव में कोई हस्तछेप नहीं होता था... मैने ऊपर जो लिखा है - पढने में शायद अटपटा सा लगे - पर है चिंतन का विषय - इसे एक बार और पढे और सोंचे... ये क्या कर रहे है हम सब लोग... ? नोट: "औरतों" और "house wife" जैसे शब्दों को प्रयोग तथ्य को समझाने हेतु केवल उदधारण के रूम में किया गया है, - कृप्या कोई इसे personal ना ले... धन्यवाद! (c) zafar ki khabar