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देश और हम

मीडिया मज़े ले रहा है और देश बदनाम हो रहा है... सरकार और हम दोनों यह समझ नहीं पा रहे है... (C) zafarkikhabar

जिसका किरदार सही नहीं वो मुसलमान कहाँ

जिसका किरदार ही सही नहीं वो मुसलमान रहा ही कहाँ, इस्लाम यही कहता है, पर इसे मानता कौन है?   छोटी मुह बड़ी बात कह रहा हूँ कि आज के भतेरे मुसलमानों को यह तक पता नही की " इस्लाम " है क्या?   रही बात इस्लाम की तो इस्लाम आज भी बदनाम नहीं है...   बदनाम किया है इसको उन लोगों ने जो इस्लाम को इस्लाम की तरह नहीं मानते है, टोपी, दाढ़ी, उंचा पायजामा, लम्बा कुर्ता या गमछा लगा लेने भर से कोई मुसलमान नहीं हो जाता है.   सबको पता है कि इस्लाम अपनी अच्छाइयों से सारी दुनिया में फैला है और इतनी अच्छे धर्म को बदनाम कर के रख दिया गया है कुछ मुट्ठी भर  "गैरमुस्लिमों और कथित अनपढ़ मुसलमानों" द्वारा जो इस्लाम का सही मायने तक नहीं जानते.   मेरा यह article मेरे इस blog में आपने पहले पढा होगा, जो बहुत कुछ समझाता है ... इसमें बहुत कुछ ऐसा है जिसके बारे में लोग जानते तक नहीं: http://zafarkikhabar.blogspot.in/2016/04/blog-post.html   अच्छा लगे तो औरों को भी पढवाएं... शुक्रिया    (c) zafar ki khabar

आतंकी का कोई धर्म नहीं होता...

अब यह समझना और समझाना कुछ आसान हो गया है कि... आतंकीयों का कोई धर्म नहीं होता...!  पर शर्त अभी भी वो ही है कि समझने कि कोशिश की जाये...! (c) ज़फर कि खबर  

बला, बला, बला...

चुनाव करीब हैं - कृप्या वाणी पर संयम रखें... क्योंकि जो होने वाला है वह निश्चित ही सबकी सोंच से परे होगा... इस बार जनता सिर्फ और सिर्फ विकास और कानून व्यस्था को देखते हुए ही मतदान करने वाली है... झूठे वायदे एवं प्रलोभन देने से कुछ नहीं होने वाला... जनता धरातल पैर देखना चाहती है कि क्या कार्य हुआ है... कुछ समझ ना आये तो "नाटो" पर ही सही... वोट ज़रूर दें... (c) ज़फर की खबर