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अंदरूनी कलह और बीजेपी

अगर नामों जल्दी न समझे तो बहूत देर हो जायेगी. क्यूकि मै पहले ही लिख चुका हूँ अमित शाह को लोग पसंद नही करते है जिसका असर बिहार मॆ सब को दिख चुका है. 

अंदरूनी तौर पर बीजेपी के अंदर की कलह अब खुलकर सामने आ रही है, एक धढा है जो यही चाहता है और उसकी पकड़ भी है इस चुनावी इलाके मॆ मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष से ज्यादा है.
 
हमारी सोच तो यह कहती है कि "अमित शाह" तो गयो. इस विषय पर नामों का यह क़दम फायदेमंद भी होगा, आने वाले समय के लिए. 

भाजपा को बचना है, तो सुधार तो करना ही पड़ेगा क्यूकि "नमो का त्लिस्म" अब टूट चुका है जनता इन्हे "फेकू" के नाम से सम्बोधित करने लगी है. 

सम्भल जाओ कयूकि गया हूआ समय लौट कर नही आता.

                                    (c) ज़फर की ख़बर

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