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दादरी - घटना तो दुखद है पर....

दादरी पर नमो द्वारा दिया गया बयान कि "मैं इस घटना से आहत हूँ" और कोई कार्येवाही न करना, यह दर्शाता है कि चाह कर भी बीजेपी अपने नेताओं बचाना चाहती और इस घटना हेतु सीधे सीधे विपक्ष को दोषी ठहराया जाना न कि राज्य सरकार को, इस बात को और भी पुख्ता करता है कि बीजेपी जान कर ऐसी बातों को नज़रअंदाज़ कर रही है.

जबकि ११ आरोपियों मे ०८ आरोपी तो बीजेपी के ही सदस्य है. उनमे से एक मुख्य आरोपी तो बीजेपी के नेता का ही बेटा है. बीजेपी कोई कदम उठाना नहीं चाहती और राज्य सरकार कुछ करेगी नहीं क्योंकि समाजवादी पार्टी और बीजेपी को अगला चुनाव २०१७ में साथ साथ जो लड़ना है.

आप लोग खुद ही देखे और अंदाज़ा लगायें कि क्या ऊपर का घटनाकर्म मेरी कही बातों की ओर इशारा नहीं करता.

जनता समझदार है समझ जाएगी - पर धीरे धीरे...

                     (c) ज़फ़र की ख़बर 

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पूरी दुनिया इंसानियत के लिए है और यह किताब भी इंसान और इंसानियत की बात बताती है पर इस किताब को इंसान से दूर कर दिया गया है, अफ़सोस! कुरान कहता है या तो क्रिमिनल हो जाओ या मुसलमान हो जाओ. जो क्रिमिनल होगा वो कभी मुसलमान नहीं हो सकता और मुस्लमान कभी क्रिमिनल नहीं हो सकता. जो कहने को मुसलमान है और क्रिमिनल है वो सिर्फ और सिर्फ "शैतान" है मुसलमान नहीं. कहा जाता है क़ुरान हिफ्ज़ कर लो - जबकि होना यह चाहिए की इसके मानी (मतलब) को समझा जाये. जिससे पता चलेगा कि एक इंसान अपनी ज़िन्दगी कैसे जिए. क़ुरान में क़रीब 6,666 आएतें है जिसमे से करीब 06 नमाज़; 06 रोज़ा और 06 ही हज के बारे में हैं. इसके इलावा सारी की सारी सिर्फ और सिर्फ इंसानियत और इंसानी ज़िन्दगी से वाबस्ता हैं. पर यह सच्चाई हमारे धर्म के ठेकेदारों द्वारा कभी किसी को सही नहीं बताई जाती है. उपरोक्त नमाज़, रोज़ा एवम् हज के पीछे क्या वजह है नहीं बताये/समझाए जाते है. बस कहा जाता है नमाज़ पढो, रोज़ा रखो, ज़िन्दगी में एक बार हज ज़रूर करो नहीं तो "गुनाह" पाओगे, गुनाह, गुनाह, गुनाह - और हम इस लफ्ज़ "गुनाह" के डर से आगे कु...